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Acidity: पेट में गैस है तो कुछ ही सेकण्ड्स में करें दूर

Nov 2, 2023
acidity

Acidity: पेट में गैस क्यों बनती है?  इससे और कौनसी बीमारियां हो सकती हैं ? साथ ही पेट में गैस से तुरंत राहत का क्या घरेलू इलाज हैं ?

वंदना चट्ठा

कहते है कि इंसान के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है। अगर किसी का दिल खुश करना हो तो उसे स्वादिष्ट भोजन करवा दो काम अपने आप बन जाएगा। स्वाद मिलने पर हम खाना खाने की मात्रा का ध्यान नहीं रखते और जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेते हैं, जिसकी वजह से पेट में गैस होने लगती है। एसिडिटी की समस्या तब पैदा होती है जब गैस्ट्रिक ग्रंथियां बहुत अधिक एसिड का उत्पादन करती है। इसके कारण ही गैस, सांस की बदबू, पेट दर्द, और दूसरी समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

गैस दो तरह से शरीर में बनती है। एक तब बनती है जब भोजन करते हुए हवा शरीर में प्रवेश करती है। इससे शरीर में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन शरीर में आ जाता है। वहीं दूसरी तरह गैस तब बनती है जब हम भोजन पचाने की प्रक्रिया में होते हैं तो हाइड्रोजन, मीथेन या कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें शरीर में बनने लगती हैं। इन गैसों का समय पर कुछ ना किया जाए तो यह बहुत सारी दिक्कतें पैदा कर देती हैं।

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गैस बनने के क्या सिम्टम्स होते हैं आइये जानते हैं

निरंतर गैस आना या वृद्धि होना

बदबूदार गैस बनना

निरंतर डकार आना

पेट फूलना

पेट में दर्द होना।

 

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क्या आप जानते हैं की जब गैस होती हैं तो किन दिक्क़तों का सामना करना पड़ता हैं

लिवर की कमजोरी के कारण पेट में जब कब्ज ज्यादा हो तो मल सड़ने लगता है ओर गैस बनने लगती है। पेट की तकलीफ से दुनिया में 76 फीसदी लोग पीड़ित हैं। गैस प्रॉब्लम होने पर अवसाद या डिप्रेशन भी हो सकता है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानियों को चिंता और अवसाद से भी जोड़ा जाता है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि पेट की समस्याएं तनाव पैदा करती हैं।

 

गैस की वजह से पेट में तेज दर्द होना, बहुत बेचैनी या सूजन महसूस होना, दस्त या कब्ज, मितली, वजन कम हो जाना और शौच में खून आना, बवासीर, डायरिया  जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं गैस शरीर के किसी भी हिस्से में बन सकती है। आंत इनमें से एक है। आंतों में गैस बनने से उदर विकार, पेट दर्द, पेट का फूलना, बेचैनी, पाचन और  लिवर का कमजोर होना। वायु विकार होने पर बहुत गैस बनती है। बार-बार डकारें भी आती रहती हैं. उसे कई बार तो लगता है जैसे गैस सिर में चढ़ गई और सिर बहुत भारी हो गया है. इसके कारण ही  नींद भी नहीं आती, कभी घबराहट भी होने लगती है|  भूख की कमी, वजन घटना, उल्टी, बुखार, शौच का रंग काला या लाल हो तो तुरंत जांच करा लेनी चाहिए। यह गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।

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हार्ट अटैक के दर्द और गैस के दर्द के बीच अंतर |Difference Between Acidity and Gas.

एसिडिटी वह स्थिति है जिसमें शरीर पाचन के लिए आवश्यक मात्रा से अधिक अम्ल का उत्पादन करता है. अम्लता आमतौर पर हार्ट बर्न के साथ होती है | खट्टी डकार और जलन होती है |

गैस का दर्द सीने के बिल्कुल बीच में होता है और हार्ट अटैक के दौरान चेस्‍ट में लेफ्ट साइ़ड तेज दर्द वो भी दबाव के साथ होता है।

महिलाओं को माहवारी के दौरान भी पेट में दर्द होता है। लिवर की कमजोरी और कब्ज के कारण मासिक धर्म साफ ओर नियमित नहीं होता।

छोटी आंत कुछ कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन को अवशोषित करती है और शेष गैस को तेजी से बड़ी आंत में भेजती है। यदि छोटी आंत में रुकावटें आती हैं, तो गैस पॉकेट में 3,500 क्यूबिक सेमी (200 क्यूबिक इंच) गैस जमा हो सकती है।

 

गैस और ब्‍लोटिंग से तुरंत राहत पाने के घरेलू तरीके

 

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सेब के सिरके का करें सेवन

शरीर में बहुत बार एसिड रिफ्लक्स की वजह से भी गैस बनती है । ऐसे में सेब के सिरके का उपयोग फायदेमंद होता है ।  केवल एक कप गुनगुने पानी में दो बड़े चम्मच अनफिल्टर्ड सेब के सिरके को डाल कर पीना है।  दो बार सेवन करने से आपको पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल जाएगी। सेब का सिरका आंत में अम्लीय माइक्रोएन्वायरमेंट प्रदान करता है और पाचन एंजाइमों के संश्लेषण को सक्रिय करता है। इससे पाचन क्रिया मजबूत होती है और गैस के कारण पेट में दर्द, सूजन और अन्य लक्षणों को भी कम करता है। रोजाना एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर सेवन करने से गैस्ट्रिक पेन से राहत मिलता है।

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छाछ का सेवन

छाछ सात्विक भोजन की श्रेणी में आता है। इसके अंदर लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो गैस्ट्रिक एसिडिटी से आपको राहत दिलाता है। आपको कभी भी गैस की समस्या महसूस हो तो तुरंत एक गिलास छाछ में थोड़ी काली मिर्च और धनिए का रस मिलाकर पी जाएं। इससे आपको जल्दी ही गैस से राहत मिल जाएगी।

 

 केले का करें सेवन

सदियों से केले का उपयोग एसिडिटी या गैस से राहत पाने के लिए किया जा रहा है। केले में प्राकृतिक एंटासिड होता है जो एसिड रिफ्लक्स को रोकने में सहायता करता है। गैस से राहत पाने के लिए रोजाना एक केले का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है |

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खाने में करें लौंग का उपयोग

लौंग का सेवन सेहत पर तो सकारात्मक प्रभाव डालता ही है साथ ही इसका कार्मिनेटिव प्रभाव गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में गैस बनने से रोकता है। अगर राजमा, या काले चने बनाए तो इसे बनाते समय लौंग का उपयोग जरूर करें। लौंग सूजन, गैस्ट्रिक पेन, पेट फूलना, कब्ज आदि के लिए एक पारंपरिक उपाय है। लौंग को चबाने या भोजन के बाद इलायची के साथ एक चम्मच लौंग के पाउडर का सेवन करने से पाचन एसिड का स्त्राव होता है। जिससे एसिडिटी से बचाव होता है और पेट में जमा अधिक गैस बाहर निकल आती है।

 

भुने जीरे के पानी का करें प्रयोग

जीरा एक बेहतरीन एसिड न्यूट्रलाइजर होता है। यह ना केवल पाचन संबंधित दिक्कतों को दूर करता है बल्कि यह पेट दर्द से भी राहत दिलाता है। भोजन के बाद भुने हुए जीरे को थोड़ा सा क्रश करें और इसे एक गिलास पानी में डालकर पी लें। या फिर गरम पानी में एक चम्मच जीरा डालकर पीएं।

 

दालचीनी से दूर करें पेट में गैस बनना

दालचीनी एक ऐसा मसाला है जो स्वाद के साथ – साथ शरीर के विभिन्न अंगों के लिए फायदेमंद है। आपको बता दें कि यह एक आम मसाला है जो प्राकृतिक एंटासिड के रूप में कार्य करता है और पाचन को बेहतर कर पेट को शांत रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में इंफेक्शन को ठीक करता है। इसके लिए आप रोजाना चाय में दालचीनी डालें या काढ़ा बना के पीएं ।

 

 तुलसी के पत्तों का सेवन

तुलसी के पत्तों के अंदर कार्मिनेटिव गुण होते हैं जो आपको एसिडिटी से तुरंत राहत दिलाता है। इसके लिए आपको केवल तुलसी के तीन से चार पत्ते लेने हैं और इन्हें खा लेना है। इसके अलावा आप चाहें तो गरम पानी में डालकर भी इनका सेवन कर सकते हैं। काढ़ा बना के भी पीने पर आराम आ जाता है|

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दही

दही में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन को बढ़ाने में मदद करते हैं। दही में पानी, जीरा पाउडर आर काला नमक मिलाकर पीना पेट के लिए फायदेमंद होता है। इसे स्मूदी में सेब के साथ मिलाकर भी सेवन किया जा सकता है। छाछ बना कर भी पीने से आराम आएगा |

 

सौंफ

सौंफ का बीज गैस्ट्रिक पेन को दूर करने में बहुत फायदेमंद होते है। भोजन के बाद सौंफ को चबाने से पाचन बेहतर होता है। इसमें कुछ महत्वपूर्ण यौगिक पाए जाते हैं, जो भोजन को आसानी से पचाते हैं। इससे अपच और कब्ज की समस्या नहीं होती है।

 

 

हर्बल टी

हर्बल चाय पौधों के एक्सट्रेक्ट से बनती है जिससे इसमें कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। हर्बल टी का सेवन करने से पाचन मजबूत होता है और गैस के कारण पेट में होने वाला दर्द कम होता है। इसके लिए अदरक, पिपरमिंट और कैमोमाइल टी का सेवन किया जा सकता है।

 

वेजिटेबल ड्रिंक्स

गैस्ट्रिक दर्द वाले लोगों के लिए फलों का रस अच्‍छा नहीं माना जाता, क्‍योंकि उसमें शुगर और एसिड का लेवल काफी ज्‍यादा हाई होता है। लेकिन सब्‍जियों का रस और स्मूदी इसे ठीक करने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, आलू के रस में एंटी-ऑक्सीडेटिव गुण होते हैं और यह पेट दर्द से राहत दिलाता है। कद्दू का रस गैस्ट्रिक एसिडिटी को कम करता है, जिससे पेट की लाइनिंग तेजी से ठीक हो जाती है।

 

हाई फाइबर फूड

उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ जैसे नट और बीज, फलियां, जामुन, और हरी सब्जियां पूरे पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होती हैं और गैस्ट्रिक दर्द से निपटने में मदद करती हैं। गैस्ट्रिक स्वास्थ्य के लिए ब्रोकोली विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। फाइबर का एक अच्छा स्रोत होने के अलावा, इसमें सल्फरफेन का उच्च स्तर भी होता है।

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कुछ और उपाय भी आप अपना सकते है जैसे

हरड़ मुरब्बा मल को गलाता है। जिससे गैस नहीं बनेगी

गुलकन्द गैस बनने से रोकता है।

मुनक्का मल को बांधता है। गैस से छुटकारा दिलाता है |

पेट में गैस बनने पर अजवाइन का इस्तेमाल बेहद ही फायदेमंद होता है।

हींग, अदरक, त्रिफला भी आराम दिलाता है |

 

किन चीज़ों से परहेज करना चाहिए

नमकीन दही, अरहर की दाल, पालक, हल्दी, अदरक, रात्रि में फल, जूस, गरिष्ठ भोजन, माँस, नॉनवेज, अण्डे, सलाद, दही कई लोगों के पेट में गैस की समस्‍या बनाती है।पेट में गैस के कारण होने वाले दर्द को दूर करने के लिए ये सभी घरेलू उपाय बहुत कारगर होते हैं। लौंग, सेब का सिरका और दही का नियमित सेवन करने से पेट से जुड़ी समस्याएं कम होकर कुछ टाइम बाद खत्म हो जाती हैं| ये सभी चीज़ें रसोई में आसानी से मिल जाती हैं तो देर किस बात की तुरंत लाभ उठाइये |