यूरिक एसिड का घरेलू उपचार | Uric Acid Home Remedy

सेब का सिरका – खून में यूरिक एसिड के बढ़े स्तर को कम करने के लिए सेब का सिरका काफी फायदेमंद है। यह एक डिटॉक्स (Detox) मेडिसिन की तरह कार्य करता है जो यूरिक एसिड के तत्वों को
तोड़कर उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। रोजाना दिन में 3 बार एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर सेवन करें।
नींबू – तथ्य यह है कि नींबूनीं बूशरीर में एसिड के लेवल को बढ़ा देता है। लेकिन नींबूनीं बूसिर्फ अल्कलाइन एसिड (Alkaline Acid) की मात्रा को भी बढ़ाता है। नींबूनीं बूका सेवन कर ब्लड से यूरिक एसिड की मात्रा को दूर किया जा सकता है। एक गिलास गुनगुने पानी में दो से तीन चम्मच नींबूनीं बूका रस डालकर रोज़ाना सुबह खाली पेट पीएं।
चेरी – चेरी का सेवन करने से यूरिक एसिड का स्तर कम होता है। आप डार्क चेरी (Dark Cherry) का भी सेवन कर सकते हैं। 2 से 3 हफ्ते तक रोजाना चेरी का सेवन करने से यूरिक एसिड का लेवल कम हो जाता है। आप चेरी का जूस भी पी सकते हैं।
जैतून का तेल – सब्जियों में अन्य तेल के बजाय जैतून के तेल का सेवन करना शुरू कर दें। जैतून के तेल में मोनो अनसैचुरेटेड फैट (Mono Unsaturated Fat) मौजूद होता है जिससे यूरिक एसिड का लेवल कम होता है।
बेकिंग सोडा – एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर रोजाना पीने से यूरिक एसिड का स्तर सामान्य रहता है। बेकिंग सोडा में अल्कलाइन तत्व पाए जाते हैं जो यूरिक एसिड को पहले से अधिक घुलनशील बना देते हैं। ऐसा होने पर किडनी यूरिक एसिड को आसानी से फिल्टर कर पाती है। प्यूरिन का सेवन न करें अधिक मात्रा में प्यूरीन का सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है। प्यूरिन ज्यादा मात्रा में जानवरों के मांस में पाया जाता है। इसलिए मीट का सेवन कम से कम करना चाहिए।
फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन करें – फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन करने से यूरिक एसिड किडनी के द्वारा आसानी से एब्जॉर्ब (Absorb) हो जाता है। इसके साथ साथ आप ऐसे पदार्थों का भी सेवन कर सकते हैं जिसमें र्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
दूध का सेवन – रोज रात में सोने से पहले एक गिलास दूध पीने से भी बढ़ी हुई यूरिक एसिड में लाभ मिलता है। इस समस्या से बचने के लिए आप रोजाना रत में सोने से पहले एक गिलास दूध का सेवन करना चाहिए।
गेंहू के ज्वार – गेहूं के ज्वार का सेवन करने के ढेरों फायदे हैं। यह शरीर को डिटॉक्स तथा यूरिक एसिड के लेवल को कम करता है। गेहूं का ज्वार विटामिन सी और क्लोरोफिल (Chlorophyll) से भरपूर है जो कई अन्य लाभ प्रदान करते हैं। कैंसर की कोशिकाओं को नियंत्रित करने के लिए भी गेहूं के ज्वार के रस का सेवन किया जाता है।
यूरिक एसिड बढ़ने का आयुर्वेदिक इलाज एवं उपचार
आयुर्वेद में हर हर तरह की बीमारियों की व्याख्या की गई है और उससे परमानेंट छुटकारा पाने के कई तरीकों को भी बताया गया है। ठीक इसी तरह आयुर्वेद में बढ़ी हुई यूरिक एसिड के कुछ खास क्रियाओं के बारे में भी बताया गया है जिसकी मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि आयुर्वेद में हाई यूरिक एसिड का इलाज कैसे किया जाता है।
स्नेहन कर्म – इस प्रक्रिया में मरीज के शरीर को तरह तरह की जड़ी बूटियों द्वारा बनाए गए तेल की मदद से अन्दर और बाहर से चिकना बनाया जाता है। ऐसा करने से अमा (मरीज द्वारा खाया गया वह खाना जो पचा नहीं है) नीचे पाचन तंत्र में आ जाता है। इसके बाद अमा पंचकर्म की विधि की मदद से बाहर निकाल लिया जाता है। इसके साथ साथ स्नेहपान में वैद्य मरीज की बीमारी के अनुसार औषधीय तेलों का निर्माण कर उसे मरीज को पीने के लिए देते हैं। स्नेहन कर्म से हाई यूरिक एसिड कम और गठिया एवं पथरी जैसी बीमारियां खत्म हो जाती है।
उपनाह कर्म – यह कर्म स्वेदन कर्म का एक हिस्सा है जो शरीर से वात दोष बाहर निकालने में मदद करता है। इस प्रक्रिया में जड़ी बूटियों से निर्मित की गई पुल्टिस से मरीज के प्रभावित हिस्से की सिंकाई की जाती है। जब सिंकाई हो जाती है तो उस हिस्से में रात भर के लिए गर्म ऊनी कपड़ा लपेट दिया जाता है उपनाह कर्म के लिए गेहूं, जौ और कुठ जैसी कई जड़ी बूटियों को प्रयोग में लाया जाता है।
विरेचन कर्म – इस कर्म का मुख्य उद्देश्य पित्त को बाहर निकालना होता है। इस कर्म में मरीज को दस्त दिलाया जाता है। दस्त करवाने के लिए वैद्य तरह-तरह की जड़ी बूटी का प्रयोग करते हैं। इस क्रिया के बाद व्यक्ति अपने शरीर में हलकापन महसूस करता है। यह न केवल यूरिक एसिड की मात्रा कम करने के लिए प्रयोग किया जाता है बल्कि, इसकी मदद से पेट के अल्सर, योनि रोग, ट्यूमर, लम्बे समय से होने वाली बुखार आदि को भी ठीक किया जा सकता है।
बस्ती कर्म – इस कर्म में एनिमा का प्रयोग किया जाता है जिसकी मदद से किडनी स्वस्थ होकर सही से काम करने लगती है और फिर यूरिक एसिड सही सही ढंग से फिलटर होने लगता है। एनिमा करने के लिए काढ़ा या तेल का इस्तेमाल किया जाता है। वैद्य अक्सर अरंडी के तेल का इस्तेमाल करते हैं। इस चिकित्सा के बाद एक घंटे तक किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही एक से दो दिन तक कोई भी बड़ा या भारी काम नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर को थकान हो जाती है।
यूरिक एसिड बढ़ने पर करना चाहिए –
1. भरपूर मात्रा में पानी पीयें।
2. अत्यधिक व्यायाम न करें।
3. ठंडे आहार से दूरी बनाकर रखें।
4. मल वेग और यूरिन वेग को न रोकें।
5. फैट वाली सामग्री का सेवन करने से बचें।
6. दिन में सोने से परहेज करें और धूप में न जाएं।
7. टमाटर और दूध से जुड़ी किसी भी चीज का सेवन न करें।
