25 घरेलू उपाय जो आसानी से कण्ट्रोल कर सकते हैं डायबिटीज को | डायबिटीज का उपचार न किया जाए तो डायबिटीज बनता है कई बिमारियों का कारण। इसमें व्यक्ति का अग्न्याशय (Pancreas) पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता या शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन को ठीक प्रकार से प्रतिक्रिया नहीं देती। ग्लूकोज को अन्य कोशिकाओं तक पहुँचाने का काम इन्सुलिन का होता है और डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन बनना बंद या कम हो जाता है तो रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है और यह मूत्र के जरिए निकलने लगता है। इसी कारण डायबिटीज के मरीज को बार-बार पेशाब आना, प्यास लगना और भूख भी ज्यादा लगती है। आज के समय में तो डायबिटीज होना बहुत ही आम बात है। सिर्फ अधिक उम्र के लोगों में ही नहीं आज के समय में बच्चे भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे है। एक समय था जब 40-50 साल की उम्र के बाद ही डायबिटीज हुआ करती थी लेकिन अब अनुचित जीवनशैली और लाइफस्टाइल के कारण छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह रोग किसी कीटाणु के कारण नहीं होता है अगर आसान भाषा में कहें तो इंसान ऊर्जा के लिए खाना खाता है, यह खाना स्टार्च में बदलता है फिर स्टार्च ग्लूकोज में बदलता है जिन्हें सभी कोशिकाओं तक पहुँचाया जाता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार अनुचित आहार-विहार, व्यायाम न करना, शारीरिक श्रम कम करना, अत्यधिक तनाव आदि इन सब कारणों से व्यक्ति के त्रिदोष वात, पित्त और कफ असन्तुलित हो जाते है जो मधुमेह को जन्म देते है परन्तु इसमें कफ दोष का प्रभाव मूल होता है| डायबिटीज होने में अनुवांशिकता भी एक कारण है। यदि परिवार के किसी सदस्य माँ-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
वैसे तो कई और भी कारण है जैसे बहुत अधिक मीठा खाने, नियमित रुप से जंक फूड खाने, कम पानी पीने, एक्सरसाइज न करने, खाने के बाद तुरंत सो जाने, आरामपरस्त जीवन जीने और व्यायाम न करने वाले लोगों में डायबिटीज होने की संभावना अधिक है। वजन बहुत ज्यादा बढ़ने से उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है और रक्त में कॉलेस्ट्रोल का स्तर बहुत बढ़ जाता है जिस कारण डायबिटीज हो सकता है।
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डायबिटीज या शुगर होने के लक्षण
डायबिटीज में शरीर का ग्लूकोज बढ़ने के साथ और भी लक्षण महसूस होते हैं –
-अधिक भूख एवं प्यास लगना
-अधिक पेशाब आना
-हमेशा थकान महसूस करना
-वजन बढ़ना या कम होना
–त्वचा में खुजली होना या अन्य त्वचा संबंधी समस्याएँ होना
–उल्टी का मन होना
-मुँह सूखना
-बाहरी संक्रमण के प्रति शरीर संवेदनशील हो जाता है
-नेत्र संबंधी समस्याएँ जैसे- धुंधला दिखना
-कोई घाव होने पर उसके ठीक होने में समय लगता है। डायबिटीज में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक तरह से काम नहीं करती।
-महिलाओं में अक्सर योनि में कैंडिड इंफेक्शन होने को खतरा रहता है।
-हाथ और पैरों में झनझनाहट महसूस होना या हाथ-पैरों में दर्द और जलन होना
-डायबिटीज में व्यक्ति की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे कि मसूड़ें में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और मसूड़े कमजोर होकर दाँत ढीले हो सकते है।
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डायबिटीज से बचने के उपाय
यदि उचित खान पान और जीवनशैली के साथ घरेलु उपचारों का प्रयोग किया जाए तो निश्चित ही रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखा जा सकता है। उचित आहार और जीवनशैली का पालन करने से मधुमेह में होने वाले लक्षण एवं जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।
-सब्जियों में करेला, ककड़ी, खीरा, टमाटर, शलजम, लौकी, तुरई, पालक, मेथी, गोभी यह सब खाना चाहिए। आलू और शकरकन्द का सेवन नहीं करना चाहिए।
-फलों में सेब, अनार, संतरा, पपीता, जामुन, अमरुद का सेवन करें इसके अलावा आम, केला, लीची, अंगूर इस प्रकार के मीठे फल कम से कम खाने चाहिए।
-सूखे मेवों में बादाम, अखरोट, अंजीर खाएँ। किशमिश, छुआरा, खजूर इनका सेवन न करें।
-चीनी, शक्कर, गुड़, गन्ने का रस, चॉकलेट इनका सेवन बिल्कुल न करें।
-एक बार में अधिक भोजन न करें बल्कि भूख लगने पर थोड़े मात्रा में भोजन करें।
-डायबिटीज के रोगी को प्रतिदिन आधा घंटा सैर करनी चाहिए और व्यायाम करना चाहिए।
-प्रतिदिन प्राणायाम करना चाहिए तथा जितना हो सके तनावयुक्त जीवन जीना चाहिए।
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डायबिटीज कंट्रोल करने के घरेलू उपाय
तुलसी
तुलसी में मौजूद एन्टीऑक्सिडेंट और जरुरी तत्व शरीर में इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते है। डायबिटीज के रोगी को रोज दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट खाने चाहिए। इससे शुगर या डायबिटीज के लक्षणों में कमी आती है।

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अमलतास
अमलतास की कुछ पत्तियाँ धोकर उनका रस निकालें। इसका एक चौथाई कप प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से शुगर के इलाज में फायदा मिलता है।
सौंफ
नियमित तौर पर भोजन के बाद सौंफ खाएँ। सौंफ खाने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है। शुगर के मरीजों को इन घरेलू उपायों को अपनाने के साथ साथ परहेज का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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करेला
-आधा कप करेले का जूस शुगर की मात्रा को कम करता है। डायबिटीज को नियंत्रण में लाने के लिए करेले का जूस नियमित रुप से पीना चाहिए।
सुबह खाली पेट टमाटर, खीरा और करेले का जूस मिलाकर भी पी सकते है |
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शलजम
शलजम को सलाद के रुप में या सब्जी बनाकर खाएँ। शलजम का सेवन काफी फायदेमंद होता है।
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अलसी के बीज
सुबह खाली पेट अलसी का चूर्ण 1 छोटा चम्मच गरम पानी के साथ लें। अलसी में प्रचुर मात्रा मे फाइबर पाया जाता है जिस कारण यह फैट और शुगर का उचित अवशोषणा करने में सहायक होता है। अलसी के बीज डायबिटीज के मरीज की भोजन के बाद की शुगर को लगभग 28 प्रतिशत तक कम कर देते हैं।

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मेथी
मेथी के दानें को रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर खाली पेट इस पानी को पिएँ और मेथी के दानों को चबा लें। नियमित रुप से इसका सेवन करने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है।

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गेंहूँ
गेहूँ के ज्वार का आधा कप ताजा रस रोज सुबह-शाम पीने से डायबिटीज में लाभ होता है। बहुत ज्यादा भी नहीं पीना है इस से नुक्सान भी हो सकता है डॉक्टर की सलाह जरूर लें तभी इसका सेवन करें |
जामुन
जामुन के फल में काला नमक लगाकर खाने से रक्त में शुगर की मात्रा नियत्रित रहती है। जामुन के बीज सुखाकर पीस लें। सुबह और शाम आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेने से शुगर की मात्रा नियत्रित रहती है।
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दालचीनी
रक्त में शुगर के स्तर को कम रखने के लिए एक महीने तक अपने प्रतिदिन के आहार में एक ग्राम दालचीनी का प्रयोग करें। दालचीनी का इस्तेमाल आप शुगर की घरेलू दवा के रूप में कर सकते हैं।
आधा चम्मच दालचीनी चूर्ण सुबह गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते है |

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आंवले का रस
10 मि.ग्रा. आँवले के जूस को 2 ग्रा. हल्दी के पाउडर में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। यह डायबिटीज के लक्षणों और उससे होने वाली समस्याओं को कम करता है।
आप एक चम्मच आंवले का रस गुनगुने पानी में मिलकर भी ले सकते है|

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ग्रीन टी
ग्रीन टी में पॉलिफिनॉल्स होते है। यह शुगर को कम करने वाले हाइपोग्लिसेमिक तत्व होते है। इससे ब्लड शुगर को मुक्त करने में सहायता मिलती है और शरीर इन्सुलिन का बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर पाता है। बिना चीनी मिलाए सुबह या शाम 1–2 कप ले सकते हैं |
बेल के पत्ते
आयुर्वेद में बेल के पत्तों का उपयोग डायबिटीज के उपचार के लिए सदियों से होता आ रहा है। इसकी पत्तियों में एंथोसाइनिडाइन्स काफी मात्रा में होते है जो ग्लूकोज को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाने की प्रक्रिया को बेहतर करता है। 5 पत्ते पीसकर पानी में मिलाएं। छलनी में छान कर रोज़ सुबह पीने से कुछ ही दिनों में शुगर कण्ट्रोल होने लगती है |

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सहिजन के पत्ते
सहिजन के पत्तों का सेवन करने से डायबिटीज के रोगियों में भोजन का पाचन बेहतर होता है और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। सब्जी के रूप में दोपहर के भोजन में शामिल करें या 1 चम्मच पाउडर पानी के साथ लें | यह 300 से ज्यादा बिमारियों को कण्ट्रोल करता है |

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नीम
नीम के पत्तों में इंसुलिन रिसेप्टन सेंसिटिविटी बढ़ाने के साथ-साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को सुचारु रुप से चलाता है और शुगर कम करने वाली दवाइओं पर निर्भर होने से भी बचाता है। नीम के पत्तों के जूस का सेवन शुरु कर देना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार इस जूस को रोजाना सुबह खाली पेट पीना चाहिए।
सुबह खाली पेट 5–7 ताजे पत्ते चबाकर खाएं।

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एलोवेरा जूस
सुबह 2 चम्मच एलोवेरा जेल पानी में मिलाकर पिएं। बाजार में बना बनाया भी मिल जाता है वह भी काम में ले सकते है |
भिंडी का पानी
1 गिलास पानी में 2 भिंडी काटकर पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पीएं |

करी पत्ता
सुबह 10-12 पत्ते चबाकर खाएं या पानी में उबालकर पीएं |

लहसुन
सुबह खाली पेट 2 कच्ची कलियां लहसुन की चबाएं।
हल्दी पानी
सुबह आधा चम्मच हल्दी गुनगुने पानी में मिलाकर पीएं |
चिया सीड्स
1 चम्मच चिया सीड्स थोड़े से पानी में रातभर भिगोएं फिर अगले दिन सुबह खा लें |
अंकुरित मूंग
1 कटोरी अंकुरित मूंग सुबह या दोपहर सलाद के रूप में लें |

दही
1 कटोरी दही दोपरहर में खाने के साथ जरूर खाएं |
खीरा
दोपहर को सलाद में खीरा जरूर खाएं |
त्रिफला चूर्ण
इसे रामबाण औषधि कहा जाता है एक चम्मच त्रिफला पाउडर गुनगुने पानी के साथ रात में खा के सो जाएं | याद रखें इसके बाद दूध नहीं पीना है |

गुड़मार पाउडर
सुबह आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें कुछ ही दिनों में फर्क नज़र आने लगेगा |
किसी भी तरह के अलग लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत मिलें | 15 दिनों से ज्यादा किसी भी एक उपाय को ना अपनाएं , 15 दिनों बाद बदल लें या अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें तभी लगातार उपाय करें |
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए
जब डायबिटीज के लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर के पास जाने में देर नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर के पास जाने पर वह ये टेस्ट करने की सलाह देते है और रिपोर्ट आने पर ही इलाज निर्धारित करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह लिए शुगर की दवा का सेवन ना करें. यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है.
ग्लूकोज फास्टिंग टेस्ट – इसको फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोस (FPG) भी कहते है। यह टेस्ट बिना कुछ खाए पिए सुबह के वक्त किया जाता है। यह टेस्ट बहुत ही सटीक और सुविधाजनक होता है। Glucose fasting test डायबिटीज से पहले और डायबिटीज का पता लगाने के लिए किया जाता है।
एचबीए1सी टेस्ट – यह टेस्ट डायबिटीज के दैनिक उतार-चढ़ाव न दिखाकर पिछले दो से तीन महीनों के अन्दर होने वाले ब्लड शुगर की औसत राशि के बारे में बताता है। यह हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ी ग्लूकोस की मात्रा को भी नापता है।
-वंदना चट्ठा
